न जाने कितने शिकवे दबें दील में जो होंठों तक आ न सके .... अफ़सोस इस बात का नहीं उन्होंने दर्द दियॆ उफ्फ! .... हाले दील उन्हें पताभी न चले... Likes वर0 users have voted. Log in or register to post comments