kavita
| शीर्षक | कवयित्री | प्रतिक्रिया | नवीन |
|---|---|---|---|
| दरमियाँ ... | वृंदा | 13 | |
| सूर्य माध्यान्हीचा | देवयानी | 5 | |
| विठूराया | विजया केळकर | 13 | |
| रे मना | नलिनी | 4 | |
| अंगारिका | विजया केळकर | 11 | |
| महालक्ष्मी आरती | विजया केळकर | 6 | |
| तू जेव्हा श्रावण बनून आला | देवयानी | 2 | |
| रक्षा-बंध | विजया केळकर | 2 | |
| जेव्हा वयाची पंचाहत्तरी येते | विजया केळकर | 25 | |
| जेव्हा वयाची पंच्याहत्तरी येते — २ | विजया केळकर | 3 | |
| चांदणी चौक | मॅगी | 26 | |
| उड्डाणपूल | वावे-विशाखा | 6 | |
| वारी | देवयानी | 9 | |
| अंतरीच्या गाभाऱ्यातून.. | मी कल्याणी | 3 | |
| सुप्रभात ( चित्राधारीत ) | विजया केळकर | 6 | |
| आठवण | ज्ञाती | 7 | |
| स्थलांतर -१ | नीधप | 18 | |
| स्थलांतर - २ | नीधप | 43 | |
| रक्ताची चटक लागलेले चाकू सुरे खुले आम हिंडत आहेत. | वृंदा | 20 | |
| आठवण | विजया केळकर | 20 | |
| कवितेच्या बनात... | अवनी | 98 | |
| घे पांघरुन चांदण्या....... | विजया केळकर | 11 | |
| आठवणी | देवयानी | 9 | |
| मेघकिनारा.. | मी कल्याणी | 9 | |
| नव वर्ष | विजया केळकर | 5 | |
| ही प्रीत विलक्षण | सुप्रु | 9 | |
| सोबत | विजया केळकर | 24 | |
| शोध | प्रफे | 5 | |
| सूर्यबलक | मॅगी | 19 | |
| वाटेवर चालत जाता... | मी कल्याणी | 8 |
पाने
हिंदी / मराठी
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