kavita
| शीर्षक | कवयित्री | प्रतिक्रिया | नवीन |
|---|---|---|---|
| आनंदयात्री | मी कल्याणी | 0 | |
| वाट | सुप्रु | 7 | |
| पुन्हा एकदा | कविन | 12 | |
| जीर्ण गोष्ट | प्रफे | 17 | |
| स्थित्यंतर | प्रफे | 16 | |
| किती पहायचे ऋतू | सुप्रु | 14 | |
| संवाद | प्रफे | 13 | |
| प्रवास जोवर संपत नाही | कविन | 25 | |
| इथपासून तिथपर्यंत | मॅगी | 21 | |
| माझ्या सानपंखी धिटूक पाखरास | प्रफे | 10 | |
| सोबत | प्रफे | 12 | |
| सोहळा | प्रफे | 12 | |
| "मी" | विनार्च | 7 | |
| सवय | Radhika Godbole | 1 | |
| वार्याची झुळूक | विजया केळकर | 2 | |
| झण्ण! | नीधप | 20 | |
| तुझ्यातली मी, माझ्यातला तु. | सानि | 0 | |
| निमित्त्य | मुग्धमानसी | 1 | |
| मला माझी लायकी काही केल्या सापडत नाही! | मुग्धमानसी | 14 | |
| स्त्री जन्मा... | चिन्नु | 2 | |
| माझी लेखणी | विजया केळकर | 6 | |
| अंतर | प्रफे | 17 | |
| प्रेम | विजया केळकर | 2 | |
| किनारा | अवल | 25 | |
| मतदान माझा हक्क | विजया केळकर | 0 | |
| वीस वर्षांनंतर कदाचित... कायली हॅरिस कविता भावानुवाद | वाइज आउल | 2 | |
| नव मैत्रीण - उपक्रम | अनुजा मंदार | 23 | |
| कातरवेळ | nanda | 2 | |
| सुखाचा शोध | nanda | 7 | |
| फोटोमधला तू | मॅगी | 10 |
पाने
हिंदी / मराठी
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