kavita
| शीर्षक | कवयित्री | प्रतिक्रिया | नवीन |
|---|---|---|---|
| भाकरी | रश्मी भागवत | 8 | |
| फिर भी... | प्रफे | 19 | |
| कोजागिरी | रश्मी भागवत | 1 | |
| शोध स्वतःचा | अन्जू | 22 | |
| Infatuation | अनुजा मंदार | 15 | |
| हरवलेला पाऊस | मॅगी | 15 | |
| तो निमित्त | अंजली मायदेव | 14 | |
| झुला | रश्मी भागवत | 1 | |
| अंबेचा उदो उदो बोला | विजया केळकर | 1 | |
| ओढ | प्रफे | 6 | |
| म्हातारी | रश्मी भागवत | 5 | |
| साम्राज्ञी - पाब्लो नेरुदा - अनुवाद | संघमित्रा | 8 | |
| आई तू कुठे आहेस ? | Shalmali | 46 | |
| प्रार्थना | विजया केळकर | 0 | |
| श्रावण | विजया केळकर | 3 | |
| अंगाई गीत | विजया केळकर | 4 | |
| निरमोही | अवल | 10 | |
| अगदी तेव्हाच... | अवल | 10 | |
| जाहल्या काही चुका...( पाडगावकरांची क्षमा मागून __/\__) | अवल | 4 | |
| निमित्त | प्रफे | 30 | |
| गाज | अवल | 16 | |
| शब्द | अन्जू | 13 | |
| कळी | विजया केळकर | 7 | |
| ती राधा होती, हरीच्या अधरी... | अवल | 9 | |
| आठवणी | हर्षा | 0 | |
| प्रेम | सुमुक्ता | 8 | |
| वळण | प्रफे | 6 | |
| अदभूत दिवस | विजया केळकर | 0 | |
| वाटचाल | अवल | 8 | |
| गप्पा | अन्जू | 14 |
पाने
हिंदी / मराठी
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